दोस्तो मेरा नाम अभय शुक्ल है और मै यूपी में प्रयागराज से हूं दोस्तो जब मै करीब 5 साल का था तब मेरे घर वाले मुझे मेरे मामा के घर छोड़ दिए ताकि मै पढ़ सकूं मेरे घर और गांव की हालत बहुत बेकार थी कोई पढ़ लिख नहीं रहा था इसी वजह मेरे पिता जी मुझे मेरे मामा के घर पढ़ाई करने के लिए छोड़ दिए
तब मै वाहा पे गया और मेरा नाम एक स्कूल में यूं केजी मै लिखवाया गया वाहा पे मै पढ़ाई करता था और मेरी सिस्टर भी वही पे रहती थी तो वो मेरा ध्यान देती थी और मुझे घर
- पढ़ाती थी लेकिन जब कोई कुछ बोल देता था या कोई दांट देता था तो मै बहुत ज्यादा दुखी होता था और मुझे मेरा घर याद आता था तब उस समय मुझे कुछ नहीं पता था कि मेरे माता पिता कैसे मुझे पढ़ा रहे है मेरे पिता जी एक किसान थे और बहुत मेहनती थे लेकिन वो जितना मेहनत करते थे उनको उतना मिलता नहीं था और हमारे यहां पैसा का बहुत आभाव था लेकिन उस समय मुझे इससे कोई मतब नहीं था मै तो अपनी दुनिया में मस्त था मुझे किसी से कोई मतलब नहीं था जब मै थोड़ा बड़ा हुआ जब कच्छा 1 में अदमेशन लिया तो मै सोचता था कि मेरे पास बहुत दीमआग है और तब मै चिड़ियों को सोचता था पकड़ के पल लूंगा तभी मै जितना भी चिड़िया का घोस्ला देखता वाहा पे जाकर उनके बच्चो को पकड़ कर घर लाता और उसे चावल खिलता था लेकिन मुझे ये पता था कि कच्चा चावल तो छोटा बच्चा खा नहीं पाएगा तब मै उसे उबला हुआ चावल खिलता था और मै तब बहुत खुश होता था और इसके साथ ही जब मै कोई जादुई मूवी देखकर मै रोज गाव में जाता और 2 दोस्त के साथ वही जादुई छड़ी और नागमणि ढूंढ़ता था लेकिन वो छड़ी आज तक नहीं मिली और ना ही नागमणि मिली आऊर तब मै जब मै थोड़ा बड़ा हुआ तो जब 3 कच्छा में पहुंच गया तो मेरे जो नाना थे वो पैसा रखे रहते थे अपने पैंट में मै धीरे धीरे चोरी करना सीख गया और मै रोज कुछ पैसे उनके जेब से निकलता और खाता पिता था कोई नशा तो नहीं करता था बस बिस्कुट टफ़ी यही सब खाता था कुछ दिन चोरी किया उसके बाद पकड़ा गया और नानी ने मुझे बहुत पीटा तो कुछ दिन के लिए तो चोरी छोड़ दिया लेकिन फिर करने लगा फिर उसके बाद कुछ दिन बाद मै घर आगया अपने माता पिता के पास तब मेरी माता जी ने मुझे समझाया की बेटा चोरी मत करो मुझे उन्होंने मेरा नहीं कवेल समझाया और उनके समझने से धीरे धीरे मै चोरी छोड़ दिया तब में थोड़ा बड़ा हो गया था और में अपने घर की हालत देख रहा था मेरे पिता bamabai गए थे वहीं पे अपना काम करते थे और अब भी करते है उस मै स्कूल में पड़ता था और घर आने के बाद मम्मी बोलती बेटा पढ़ाई कर को घर पे भी तो थोड़ा पढ़ाई घर पे भी करता था और मेरी मामी की देन है कि आज मै कुछ ठीक हूं कोई नशा नहीं करता मेरी मुझे बचपन से ही जो खराब बच्चे थे उनके साथ रहना ही नहीं देती थी इसी कारण मै थोड़ा अलग hu आऊरो से और अब मै सोचता हूं जलदी जल्दी से कुछ काम करू जिससे कुछ पैसा कमा स्कु कुकी पापा मेरे बहुत दिनों से कम कर रहे है तो तो थोड़ा हेल्प मै कर स्कू तो ठीक रहेगा दोस्तो हर कोई अपना मंजिल पा सकता है इस दुनिया में कोई आइसा काम नहीं जिसे हम नहीं कर सकते बस हम जिस दिन सोच लिए उसडिंन कर दिए लेकिन हम लोग बीच में अपना रास्ता बदल देते है यही कारण है कि सब लोग अपनी ज़िन्दगी में सफल नहीं होते हम लोग जब देखते है मेरे काम के बीच में कोई अड़चन आरही तो हम लोग अपना रास्ता ही बादल देटे है


0 تعليقات